Amit Kumar

Add To collaction

जन्माष्टमी के अवसर पर प्रस्तुत कविता

गोकुल की गलियों में
रास रचाते गिरधारी
माता यशोदा के लाल
मेरे मदन मुरारी

ग्वाल बाल के संग खेलें खेल बनवारी
हर गलियों में बांसुरी बजाए
ओ मेरे कृष्ण कन्हाई

राधा मोहन के बांसुरी की थी दीवानी
ग्वाल बाल सब साथ गाय भी कराती थी सवारी

 बड़े नटखट थे मेरे श्याम बिहारी
माखन के दीवाने थे हमारे
बलिहारी
गोपियों की मटकी फोड़े
हमारे कृष्ण कन्हाई

इनकी लीलाओं धन्य हो गई थी ये धरती
जब बंसी बजाए मोहन कट जाए रात काली

यमुना तट किए काले नाग की सवारी
गोकुल वासियों को नृत्य कर दिए बधाई

प्रभु की लीला देख पुलकित हुए सब बृजवासी
कैसे रास रचाते हैं बलदाऊ के भाई

प्रेम के प्रतीक हैं कृष्ण व राधा रानी
मानवता की पहचान है हमारे बृजवासी

प्रभु ने जन्म लेकर इस धरा को भी तार दिए
मानव का क्या अंबर को भी
जीवन दान दिए

पंडित अमित कुमार शर्मा
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
मो.8707290713

   7
4 Comments

Swati chourasia

30-Aug-2021 06:46 PM

Very beautiful 👌👌

Reply

Niraj Pandey

30-Aug-2021 06:17 PM

वाह

Reply

बहुत ही सुन्दर रचना 👌👌

Reply